पंचामृत पंजीरी प्रसाद (Panchamrut Panjiri Prasad)

पंचामृत और पंजीरी (Panchamrit Panjeeri Prasad) सत्यनारायण की कथा, भागवत पूजा, कृ्ष्ण जन्माष्टमी आदि की पूजा के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है इसे चरणामृत (Charanamrit or Charanamrut) भी कहा जाता है. पंचामृत इसलिये कहा जाता है क्यों कि यह पांच चीजों को मिलाकर बनाया जाता है.आइये बनाना शुरू करें पंचामृ्त.
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आवश्यक सामग्री - Ingredients for Panchamrut
- ताजा दही - 400 ग्राम (2 कप)
- ठंडा दूध - 100 ग्राम (आधा कप)
- चीनी - 50 ग्राम ( एक चौथाई कप)
- शहद - 1 टेबल स्पून
- मखाने - 10 - 12
- तुलसी के पत्ती - 8-10
विधि - How to make Charnamrit
दही को किसी बड़े बर्तन में निकालिये.
दही में दूध, चीनी और शहद डालिये और चमचे से चलाकर मिला दीजिये.
मखाने को 4 टुकड़े करते हुये काटिये और इस मिश्रण में मिला दीजिये, तुलसी के पत्ते भी बारीक कतर कर मिला दीजिये, लीजिये ये बन गया आपका पंचामृत या चरणामृ्त (Panchamrut or Charnamrit)
पंजीरी (Panjiri)
चरणामृ्त के साथ पंजीरी भी प्रसाद में बनायी जाती है.
पंजीरी से हमें बचपन की याद आ गई, पंजीरी हम बचपन में खाते कम थे फैलाते ज्यादा थे, मेरे बड़े भाई ने एक दिन बोला था कि पंजीरी मूंह में डाल कर फूफा बोलो तो हमने वो कर दिया और सारी पंजीरी मूंह से उड़ गई और आस पास खड़े बच्चे खूब हसे, तो कभी कभी हम बच्चे मिल कर खूब पंजीरी उड़ाते थे, तो आइये वह पंजीरी भी बनाना शुरू करते हैं.
आवश्यक सामग्री - Ingredients for Panjeeri
- गेहूं का आटा - 150 ग्राम (1 कप)
- घी - 50 ग्राम (1/4 कप)
- बूरा (पिसी चीनी) - 100 ग्राम(आधा कप)
- मखाने - 10 - 12
- इलाइची - 2 (छील कर कूट लीजिये)
विधि - How to make Panjeeri
आटे को किसी बर्तन में छान कर निकालिये.
भारे तले की कढाई गैस फ्लेम पर रखिये और कढाई में घी डालकर गरम कीजिये, गरम घी में आटा डालिये और मीडियम गैस फ्लेम पर करछी से चला चला कर भूनिये, जब आटे में महक आने लगे और कलर ब्राउन हो जाय तब गैस फ्लेम बन्द कर दीजिये.
भुने आटे को ठंडा होने दीजिये.
एक मखाने को 4-5 टुकड़े करते हुये काट लीजिये, छोटी कढ़ाई में 2 छोटी चम्मच घी डाल कर गरम कीजिये, कतरे हुये मखाने गरम घी में डालिये और ब्राउन होने तक चमचे से चलाते हुये भून लीजिये. इलाइची को छील कर पाउडर बना लीजिये.
भुने हुये मखाने, बूरा, इलाइची पाउडर को आटे में मिलाइये, आह ये स्वादिष्ट पंजीरी तैयार है. आप ये पंजीरी अभी खाइये और बची हुई पंजीरी एअर टाइट कन्टेनर में भर कर रख लीजिये, जब भी आपका मन करे, कन्टेनर से पंजीरी निकालिये और खाइये, यह पंजीरी 2 महिने तक भी अच्छी रहेगी.
कविताजी ने चरणामृ्त रैसिपी के बारे में पूछ कर मुझे मेरे बचपन की याद दिलादी, बचपन में हम जहां रहते थे, वहां हर महिने ही हमें सत्यनारायण की कथा में जाने का मौका मिल जाता था और तभी हमें प्रसाद के रूप में पंचामृत पंजीरी खाने को मिलता थी, लेकिन अभी मुझे यह मौका नसीब नहीं होता, कविताजी धन्यवाद
आज हम ये पंजीरी बहुत साल के बाद बना रहें हैं.
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निशा: प्रीति, आप सही कह रही हैं ये लोटस सीड्स ही है.