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Sabudana khichdi Recipe साबूदाना खिचड़ी

image साबूदाना खिचड़ी (Sabudana khichdi )

साबूदाने की खिचड़ी (Sabudana Khichadi ) मुख्यत: व्रत उपवास में बनाकर खाई जाती है. आईये आज बनायें साबूदाने की खिचड़ी. Sago Khichdi.

यदि आप भी इसको उपवास के लिये बना रहे हैं तो इसमें सामान्य नमक की जगह सैंधा नमक का प्रयोग करें. साबूदाना दो तरह के होते हैं एक बड़े और एक सामान्य आकार के. यदि आप बड़े साबूदाना प्रयोग कर रहे हैं तो इसे 1 घंटा भिगोने के बजाय लगभग 8 घंटे भिगोये रखें. बाहर एशियाई स्टोर्स में यह साबूदाना Tapioca के नाम से उपलब्ध हो जाता है.

छोटे आकार के साबूदाने आपस में हल्के से चिपके चिपके रहते हैं लेकिन बड़े साबूदाने की खिचड़ी एकदम अलग बिखरी होती है. मुझे छोटे साबूदाने की अपेक्षा बड़े साबूदाने की खिचड़ी अधिक अच्छी लगती है लेकिन बड़े साबूदाने आस पास की किराना दुकानों में नहीं मिलते.

आवश्यक सामग्री

  • साबूदाना - 100 ग्राम
  • तेल या घी - 1.5 टेबल स्पून
  • जीरा - आधा छोटी चम्मच
  • हरी मिर्च - 2-3 ( बारीक कतरी हुई)
  • मूंगफली के दाने - आधा छोटी कटोरी)
  • पनीर - 50 ग्राम (यदि आप चाहें)
  • आलू - 1 मीडियम आकार का
  • काली मिर्च - एक चौथाई छोटी चम्मच
  • नमक - स्वादानुसार
  • कसा हुआ नारियल - 1 टेबल स्पून (यदि आप चाहें)
  • हरा धनियां - 1 टेबल स्पून (बारीक कतरा हुआ)

sabudana_khichadi_2_234454688.jpgविधि

साबूदाने को धो कर, 1 घंटे के लिये पानी में भीगने दीजिये. भीगने के बाद अतिरिक्त पानी निकाल दीजिये. यदि आप बड़े साबूदाना प्रयोग कर रहे हैं तो इसे 1 घंटा भिगोने के बजाय लगभग 8 घंटे भिगोये रखें.

आलू को छील कर धीइये और छोटे छोटे क्यूब्स में काट लीजिये. पनीर को भी छोटे छोटे क्यूब्स में काट लीजिये.

भारी तले की कढ़ाई में घी डाल कर गरम कीजिये. आलू के क्यूब्स गरम घी में डाल कर हल्के ब्राउन होने तक तल कर निकाल कर प्लेट में रख लीजिये. आलू के क्यूब्स तलने के बाद पनीर के क्यूब्स डाल कर हल्के ब्राउन तल कर उसी प्लेट में निकाल कर रखिये.

मूंगफली के दाने को मोटा चूरा कर लीजिये इसे दरेरा करें एकदम बारीक चूरा न करें

बचे हुये गरम घी में जीरा डाल दीजिये. जीरा भुनने के बाद, हरी मिर्च डाल दीजिये, और चमचे से मसाले को चलाइये, इस मसाले मे मुंगफली का चूरा डाल कर एक मिनिट तक भूनिये. अब साबूदाना, नमक और काली मिर्च डाल कर अच्छी तरह 2 मिनिट चमचे से चला कर भूनिये. 2 टेबल स्पून पानी डाल कर धीमी गैस पर 7-8 मिनिट तक पकाइये,

ढक्कन खोलिये और देखिये कि साबूदाने नरम हो गये है. यदि नहीं हुये हैं, और आपको मह्सूस हो कि अभी साबूदाने पकने के लिये और पानी चाहिये, तब 1 या 2 टेबल स्पून पानी डाल कर 4-5 मिनिट धीमी गैस पर और पकने दीजिये. आलू और पनीर के क्यूब्स मिला दीजिये. और चलाकर कढ़ाई को गैस से उतार लीजिये साबूदाना की खिचड़ी को बाउल या प्लेट में निकालिये. हरा धनियां नारियल ऊपर से डाल कर सजाइये.

आपकी साबूदाने की खिचड़ी (Sabudana khichdi ) तैयार है. इसे गरमागर्म परोसिये.

 

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आपके कमेन्ट्स (4 मिले):

khushi on 29 February, 2008 11:14:34
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bahut badhiya. but in dino bazar main jagah jagah sabudand khichadi ke thale lage rahte hai jaha bahut hi taste khichadi milti hai ,wo log khichadi bhaap per banate hai,kya aap uski vidhi bata sakti hai.
निशा मधुलिका on 29 February, 2008 02:28:16
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खुशी जी, पोहे और साबूदाना को गर्म पानी के भगोने के ऊपर एक कढ़ाही में इन्हें रखकर इन्हें इसलिये रखलिया जाता है कि ये गर्म रहें. जहां तक मेरी जानकारी है, इन्हें भाप में नहीं पकाया जाता.
पंकज सुबीर on 29 February, 2008 04:51:16
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निशा जी पोहा तो वास्‍तव में पानी के गर्म भगोंने पर ही बनाया जाता है इससे उसमें साफ्टनेस बनी रहती है । पोहे को तेज आग पर सीधे बघार लगाने से वो हार्ड हो जाता है हम घर में भले ही पोहे को सीधे आंच पर रख देते हैं पर हलवाई कभी भी सीधे आंच पर पोहे को नहीं रखते ।
और हां एक सलाह और देना चाह रहा था आपने चूंकि मेरे सबसे फेवरेट वयंजन साबूदाने की खिचड़ी की बात की है जिसके लिये मैं कुछ भी कर सकता हूं। मैं शादियों में जाता हूं तो सारे व्‍यंजन ढूंढ कर केवल साबूदाने की खिचड़ी का ही स्‍टाल ढूंढता हूं । हलवाइयों से मैंने उनकी खिचड़ी स्‍वादिष्‍ट बनने के बारे में पूछा तो वे सचमुच ही कढ़ाई को सीधे आंच पर ना रख कर पानी के भगोने पर ही रख्‍ते हैं और हां एक महत्‍वपूर्ण बात वे आलू को फ्राई नहीं करते बलिक उबाल कर टुकड़े करते हैं इससे भी खिचड़ी की साफ्टनेस बनी रहती है । हम लोग घरों में जो गलतियां करते हैं वो ये ही हैं एक तो हम मूंगफली दाने को मिक्‍सी में पीस लेते हैं दूसरा ये कि हम आलू को तल लेते हैं जिससे वे भी हार्ड हो जाते हैं और पिसी हुई मूंगफली साबूदाने के साथ्‍ज्ञ मिलकर उसे और खराब कर देती है । हलवाई के अनुसार दानों को केवल हल्‍का खलबत्‍ते में कूटना ही चाहिये और खलबत्‍ता ना हो तो थाली में बेलन से दरदरा लें । मैंने उस अनुसार खिचड़ी बनाई तो सचमुच मजा आ गया ।
निशा मधुलिका on 29 February, 2008 06:36:56
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पंकज जी, मूंगफली को मैं भी नहीं पीसती बल्कि इसे दरेरा कर लेती हूं. मेरे चित्र में भी मूंगफली दरेरी दिख रही है.

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